Saturday, May 12, 2007

आप ब्लॅागिंग क्यों करते हैं

नमस्कार

मैं ब्लॅागिंग की दुनिया में नया हूं। अपना ब्लॅाग शुरु करने के पहले मेरे लिए ब्लॅाग का मतलब सिर्फ मोहल्ला था जहां मैं टीवी पत्रकारिता के मौजूदा ट्रेंड पर अपने विचार रखा करता हूं। मैं पिछले क़रीब 11 साल से टीवी पत्राकारिता में हूं और पिछले पांच साल से एनडीटीवी से जुड़ा हूं।

अपना ब्लॅाग लिखने के पीछे मेरी मंशा कश्मीर में बिताए क़रीब ढ़ाई साल की अपनी यादों को समेटना है और आगे चल कर इसे एक किताब का रूप देना है। इस दौरान जो आपका बहुमूल्य और अर्थपूर्ण टिप्पणी, सुझाव, अनुभव या फिर शिकायत, जो भी कुछ मुझे मिलेगा उसे उस किताब में शामिल करुंगा। इसकी शुरुआत मैंने भारत-अक्सई चिन सीमा स्थित चुसूल की अपनी यात्रा से की है। वैसे कश्मीर से अलग... जब कुछ नया, कुछ ख़ास अनुभव होता है तो वो भी आपके सामने रखने की कोशिश करता हूं।


मैं आप सबों से, जो अपना ब्लॅाग लिखते हैं या फिर दूसरों का लिखा पढ़ते हैं, ये जानना चाहता हूं कि ब्लॅागिंग के पीछे आपका मक़सद क्या है। ज़ाहिर है अपने विचार से दूसरों को अवगत कराना और दूसरों से विचारों को जानना ये तो मोटा आधार होगा ही... लेकिन किस ख़ास मक़सद से आपने ब्लॅाग की दुनिया में आए हैं। ये मैं आप सबों से जानना चाहता हूं।

मैंने देखा है कि हिंन्दी ब्लॅाग्स की तादाद सैंकड़ों में है। कुछ तो वाकई बड़े अच्छे हैं और देश विदेश में काफी लोकप्रिय भी प्रतीत होते हैं। आप सब अगर चंद पंक्तियों में ब्लॅागिंग के पीछे अपने मक़सद को अपने शब्दों में बता पाएं तो उसका इस्तेमाल मैं ब्लॅाग पर अपने एक शोध के लिए करना चाहूंगा।

एक निवेदन उन लोगों से भी है जो शायद अपना ब्लॅाग नहीं लिखते हैं लेकिन दूसरों का लिखा बड़ी दिलचस्पी से पढ़ते और उसपर अपनी टिप्पणी भी देते हैं। देश और ख़ास तौर पर विदेशों में रहने वाले पाठकों से ये जानना चाहूंगा कि आखिर ब्लॅाग उनकी किस ज़रुरत को पूरा करता है।

अगर आपसब मेरे इस निवेदन को स्वीकारेंगे तो मुझे अच्छा लगेगा। हो सकता है कि इसके ज़रिए हम ब्लॅाग के अपने सभी साथियों के बीच कुछ रोचक जानकारी बांट सकें।

शुक्रिया
उमाशंकर सिंह
valleyoftruth.blogspot.com

15 comments:

flying death said...

its a way to express your thoughts..
For me something I would like to share with others, or something I dont feel like sharing with the ppl I know and I talk to ... can be easily expressed in a blog..

Reading others blogs is a way to understand what other ppl think and in general the view of the community I'm a part of.
People who are readin or writing share almost a matchin personality. I feel more comfortable with the ppl online then who never surf internet so its basically to get to know other ppl n their mentality

धुरविरोधी said...

मैं ब्लाग क्यों लिखता हूं?
अब से पहले घर वालों को अपनी बक बक सुना कर कान खाता रहता था. (अपनी पहली पोस्ट में ही कहा था) अब दायरा बढ़ गया है. घर वाले तो खुश हैं. (आप लोग थोड़े परेशान हो गये होंगे)

अनूप शुक्ला said...

भाई उमा शंकरजी, आपका ब्लाग शुरू हुआ अच्छा लगा! आप अपनी यादें बांटे! हमें इंतजार रहेगा आपकी पोस्टों का! ब्लाग क्यों लिखते हैं इसके बारे में लोगों ने समय-समय पर लिखा है अपने ब्लाग में! ज्यादातर ने शुरुआती पोस्टों में! मेरे ख्याल में अपने को अभिव्यक्त करने की इच्छा ही ब्लाग लिखने का मुख्य कारण है! ब्लाग से आप तुरंत अपनी बात कह सकते हैं!

Udan Tashtari said...

यहाँ न लिखे तो कहाँ लिखें, जहाँ हमारी इच्छा छप भी जाये और लोग पढ़ भी लेवें. वरना तो इतना बेहतरीन लेखक अंजान ही रह जाता. :)

Rajesh Roshan said...

likhne padhne ki aadat ne pahle patrkaar banwa diya aur ab blogger. Blog ke saath sabse achhi baat hai ki isme kisi organisation ki policy beech mein nahi aati hai, jo kam se kam mere liye badhiya hai.

mamta said...

एक तो आप लोगों को जानते है और आपका दायरा बढ़ता है और दूसरा यहाँ आप को कोई चुप होने के लिए नही कहता है । मतलब जितना बोलना है बोलिए।

संजय बेंगाणी said...

क्योंकि मैं अभिव्यक्त होना चाहता हूँ.

अच्छा माध्यम हाथ लगा है, अपनी बात कहने के लिए किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं. किसी पर आश्रित नहीं. भाषा शुद्धता का लफड़ा नहीं.

Sanjeet Tripathi said...

कश्मीर से जुड़े आपके संस्मरणों का इंतजार रहेगा उमा भाई।
ब्लाग लिखने के पीछे सबसे बड़ा कारण तो सबके लिए एक ही होता है कि विचाराभिव्यक्ति! इसके बाद दूसरा कारण होता है कि दुसरे क्या लिख रहे हैं पढ़ा जाए। जाने-पहचाने, छपने वाले नामों की तो किताबें या फ़िर अखबारों में प्रकाशित उनके लेख/कविता/कहानी/उपन्यास पढ़ कर उनके विचार जाने जा सकते हैं परंतु अपनी ही तरह के जनसामान्य जो कि ब्लागिंग से जुड़े हैं उनके विचार
जान ने, उन पर टिप्प्णी कर, चर्चा करने के लिए यह एक बहुत ही अच्छा माध्यम है। अब देखिये ना, आप और मैं यहां ब्लागजगत में है, इसलिए कितनी आसानी से, हम दोनो इस माध्यम के सहारे अपने विचार एक दुसरे के सामने रख पा रहे हैं। ब्लाग ना होता या आप और हम ब्लागिंग ना कर रहे होते तो क्या यह संभव होता?
और हां ब्लाग्स में टिप्प्णी का वही महत्व है जो खाने में नमक का!

rachana said...

मै गूगल पर कुछ ढूँढते हुए, इत्तफाक से चिट्ठों की दुनिया से परिचित हुई..मै उस परिवेश मे नही रहती जहाँ आमतौर पर अन्तरजाल का उपयोग किया जात हो (खासकर महिलाओं द्वारा)...दो-तीन दिनो मे ही मैने ढेर सारे चिट्ठे ( अन्ग्रेजी के) पढ डाले और मेरा अनुभव इस तरह लिखा- ( लोग या हम चिट्ठे क्यों लिखते पढते हैं? इस सन्दर्भ मे)--
BLOGS
I was wondering, what are Blogs all about?
I found that they are people’s SILENT SHOUT!!
Some laugh aloud, some scream with pain,
Emotions come out straight from their brain.
Young ones put up their personal issues,
You can find them sobbing without using tissues.
They can be boring, they can be nice,
But the language is always with added spice.
The rules of language can be put on the rack,
For writers like me, this is icing on the cake.
Whatever the subjects you feel to share.
Sports, politics, business all can be there,
The fight with friend, argument with boss,
The joys of win and sorrows of loss.
Blog reading can be good when you are alone,
You can get some expressions as your very own!!!
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I was fascinated with the world of words and it was amazing and very easy to put my views on the article by commenting on it. In this way the writer and the reader can communicate on one to one basis.
In my opinion to express the views and to share the knowledge are two basic qualities of man kind and probably reasons for evolution of human being. As Indians have many different cultures, to have opinion on each and everything is also a part of our culture. Our social setup is such that we need communication badly. We are not mould to live a lonely life, we like people to listen us and we love to listen to the people. I think blogs (where mostly employed and highly qualified persons express their views)are the advanced version of the chats of every nook and corner of every town, city or village where unemployed youth discuss various issues like politics, social, sports etc.
The best thing is there are not any criteria to be a blogger.No body is answerable to anybody.
rachana
www.rachanabajaj.wordpress.com (my Hindi blog)

Shrish said...

इस प्रश्न का सामान्य उत्तर है कि ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। बस इतना कारण पर्याप्त है इसमें सब दूसरे कारण आ जाते हैं।

जहाँ तक मेरी बात है कंप्यूटर पर नित नए टोटके आजमाता रहता हूँ, उन्ही का अनुभव साथियों से बांटने के लिए ब्लॉग लिखता हूँ।

ई-पंडित
: http://ePandit.blogspot.com

Shrish said...

वैसे आपके प्रश्न का उत्तर सर्वज्ञ पर मैंने कुछ इस तरह लिखा था:

"अपनी भाषा में लिखने का मजा ही कुछ और है। नेट पर लगभग ५०० हिन्दी ब्लॉगरों का ग्रुप है। हिन्दी ब्लॉगजगत एक परिवार की तरह है, यहाँ शीघ्र ही कई मित्र बन जाते हैं। यहाँ आपकी सभी हिन्दी लिखने वालों से मुलाकात होगी। हिन्दी चिट्ठाजगत की कुछ सामुदायिक साइटें हैं जिनके द्वारा सब चिट्ठाकार आपसी संपर्क में रहते हैं। आप भी इनमें शामिल हों। इससे चिट्ठाजगत का परिवार बढ़ने के अतिरिक्त आपको भी नियमित पाठक मिलेंगे।"

Manish said...

चिट्ठाकारी क्यूँ ? इस बारे में विस्तार से यहाँ लिखा था
http://ek-shaam-mere-naam.blogspot.com/2007/03/blog-post_04.html

संक्षेप में कहूँ तो चिट्ठाकारी मेरे लिए जिंदगी की इस भागदौड़ में अपनी रुचियों से जुड़ी रहने की कोशिश है। और जब अपनी इस कोशिश में दूर-दूर बैठे पर अपने जैसा सोचने और महसूस करने वाले दोस्त मिलते हैँ तो दिल को बेइंतहा खुशी मिलती है ।
काश्मीर के आपके अनुभवों का इंतजार रहेगा ।

Raviratlami said...

शुरूआत मैंने अपनी रचनाओं को इंटरनेट पर लाने के उद्देश्य से की. फिर जल्दी ही ऊब होने लगी. कुछ तकनीकी ज्ञान बधारने और व्यंग्य के छींटे छोड़ने की भी कोशिशें कीं. अब चिट्ठे में व्यावसायिकता और धन अर्जन की संभावनाएँ तलाशने में जुटा हूँ, ताकि चिट्ठा लेखन के लिए कहीं से तो संबल मिलता रहे मिलता रहे मिलता रहे... :)

Valley of Truth said...

आप सबों ने जिस तरह से मुझे स्वीकारा है अपनी दुनिया में.. इससे मुझे एक नया उत्साह मिला है। सचमुच आप सबों की एक एक टिप्पणी को मैं लाख लाख लोगों का अपने से जुड़ाव मान रहा हूं।

मैने अपने कश्मीर के संस्मरण लिखना पहले ही शुरु कर दिया है। इसे चुसूल यात्रा के शीर्षक के तहत आप देख सकते हैं। अपना मक़सद मैं आप सब को बता चुका हूं। मेरे पास कहने को ऐसी कई बातें है जो अब से पहले शायद ना देखी गई और अगर देखी भी गई हो तो सुनी-सुनाई नहीं गई। मैं समयानुसार एक एक कर सबको बताना चाहता हूं।

मैं हमेशा आप से दाद नहीं चाहता। खाज़ और खुजली भी चलेगा। पर कम्युनिकेशन गैप नहीं होना चाहिए।

आप सब जो लिखते हैं मैं उसे भी नियमित रूप से पढ़ने की कोशिश करुंगा और जिस विषय पर भी अपने को थोड़ा बहुत भी जानकार पाउंगा, टिप्पणी करुंगा।

मुझे लगा है कि ये दुनिया गंभीर किस्म के लोगों की है। बिलो बेल्ट हिट कराने वाले एकाध हों तो हम सब उसको दरकिनार कर देगें।

एक आख़िरी बात। मैं टीवी के लिए रिपोर्टिंग करता हूं जहां कम समय में पूरी और सही बात रखने की ज़िम्मेदारी होती है। अगर आप में से कोई मुझे कभी इस ज़िम्मेदारी से भटकता पाएं तो मुझे आगाह करने में संकोच ना करें।

एक नए रिश्ते के साथ
आपका
उमाशंकर सिंह
http://valleyoftruth.blogspot.com

Sudhir said...

मेरे लिए ब्लाग को पढ़ना शायद एक नया अनुभव है मै उस परिवेश से आया हूं जहा आधुनिकीकरण का असर तो पहुंचा है लेकिन इस हद तक नही।कंप्यूटर ही हमारे यहां अभी अजूबा समझा जाता है और इंटरनेट के प्रयोग की बात तो दूर-दूर तक नज़र नही आती। शुरुआत में मुझे ये मीडिया के कुछ जाने-पहचाने चेहरों के विचार जानने का माध्यम रहा लेकिन जल्द मैने भी इसमें हिस्सा लेना शुरु कर दिया। अच्छा लगता है जब आप अपने विचार लोगों के सामने आसानी से रख सकते है और सबसे बड़ी बात अपनी मातृभाषा में, और यही इसकी सफलता का राज़ है।

सुधीर कुमार
डी डी न्यूज़