Tuesday, May 5, 2009

kabul day 1

kabul pahunch chuka hun. yahaan se devnagree main blog update karne main kuchh samasyaa hai... comp-net janit. isliye aaj kee pooree baat baad main. yahaan dilli kee garmee se raahat hai. sham 5pm (local time) 19 degree tha... night main to 16 ke aaspaas mehsoos ho rahaa hai... :)

farid usee garm joshee se mila jaise wo pakistan main mila karta tha... 

jaaree

पाकिस्तान, तालिबान... अफ़गानिस्तान

आज अफ़गानिस्तान निकल रहा हूं। मक़सद वहां की ज़मीनी हालात को देखना और दिखाना है। एक ऐसे माहौल में जब चारों तरफ तालिबान को लेकर शोर शराबा है... आख़िर उस मुल्क़ में क्या हो रहा है जहां वो (तालिबान) पैदा हुआ, पला-बढ़ा और फिर उसकी विषबेल अपने माली (अमेरिका) को ही लपेटने में जुट गई। अमेरिकी और नाटो फोर्स के दबाव में तालिबान ने अफ़गानिस्तान से लगे पाकिस्तानी इलाक़े का रुख़ तो कर लिया है लेकिन पुरानी ज़मीन से भी उनके पैर पूरी तरह से उखड़े नहीं हैं। कोशिश होगी काबुल की ताज़ा कहानी बताने की।

Sunday, April 26, 2009

सारे लेखक हो गए... पाठक कौन बचा?

महीने बाद ब्लॉग पर आया हूं। देख रहा हूं सभी लिख रहे हैं। किसी के दिल में तो किसी के दिमाग में एक विचार है। किसी के पास अनुभव है तो किसी के पास अपना कोई ख़्याल। अच्छी बात है। होने भी चाहिए। पर देखा कि कोई किसी को पढ़ नहीं रहा। न अनुभव की कद्र है ना ख़्याल पर भरोसा। ब्लॉगवाणी के हिट्स के हिसाब से बता रहा हूं। घंटों पहले की पोस्ट पर रीडर ज़ीरो हैं... पसंद की तो बात ही मत पूछिए। नापसंद का कोई कॉलम नहीं है। याद है मझे दो साल पहले का वो वक्त। छोटी से छोटी बात लिख देने पर भी एकाध पाठक तो आ ही जाते थे। फिर अब क्या हुआ। क्या अपना पढ़ना अच्छा नहीं लग रहा या किसी और का लिखना!

Sunday, March 8, 2009

मुशर्रफ़ से मुलाक़ात

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भारत में हैं। व्यक्तिगत दौरे पर। मेरा उनसे आज एक बार फिर आमना सामना हुआ। संक्षिप्त बात हुई। मैंने उनसे कहा कि जब आपने पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाई तब मैं वहीं था... आपके इस क़दम से पाकिस्तान का बुद्धिजीवी वर्ग बहुत गुस्से में था। अब आप अलग रोल में हैं। पर पाकिस्तान में कोई बदलाव नज़र नहीं आ रहा।
मुशर्रफ़ ने मेरी पंक्तियों का क्या मतलब निकाला मुझे नहीं पता... पर एक पूरी नज़र देखा। मैंने अपना कार्ड आगे बढा दिया। ये कहते हुए कि मौक़ा मिला तो फिर आना चाहूंगा। उन्होने कहा... "स्योर"।

मुशर्रफ़ उस कॉनट्रैक्ट से बंधे थे जिसमें उन्हें किसी से भी कुछ बात करने की मनाही थी। एक मीडिया ग्रुप के अलावा। सो वे अपनी तरफ से कम से कम बोले। अब राष्ट्रपति नहीं हैं... पर कमांडो जैसी अनुशासन का पालन अब भी कर रहे हैं। नहीं तो बताते कि आख़िर जिस वजह से उनके ख़िलाफ पाकिस्तान में मुहिम चलायी गई वो वजहें अब भी क़ायम हैं। ज़रदारी बतौर राष्ट्रपति उन्हीं अधिकारों को छोड़ने को तैयार नहीं जिन्होने जेनरल मुशर्रफ को मुशर्रफ़ के तौर पर ब्रांड कर दिया। पर फिलहाल वे ख़ामोशी में ही बेहतरी समझ रहे हैं। शायद किसी बेहतर कल के इंतज़ार में।

आगे भी और बात होगी।

Wednesday, December 31, 2008

शुभकामनाएं!


जाते साल को सलाम... नया साल 2009 आप सबों को एक नए क्षितिज पर ले जाए... शुभकामनाएं....

Thursday, November 27, 2008

मुंबई पर हमला

मुंबई पर फिर हमला हुआ है। हम तैयार हैं कब तैनाती हो जाए...

पर कई बातें ज़ेहन में आती हैं। कुछ ही घंटों के अंदर...

सरकार कहेगी, हम निंदा करते हैं... पूरी तरह जांच की जाएगी... दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी... किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस कहेगी... पहली बार समुद्री रास्ते से आए आंतकी। नया मोडस आपरेंडी।
(हालांकि हमारे एनएसए पहले ही इसके बारे में चेता चुके हैं। पर शायद वो चेते नहीं)

विपक्ष कहेगा, ये सरकार की विफलता है। वो हिंदू आतंकवाद का झूठा ख़ौफ दिखा रही है... असल में ख़तरा जेहादी आतंकवाद का है। हम आए तो पलट देंगे तस्वीर... ।

अख़बार टीवीओं पर ख़बर आएगी... पटरी पर लौटी ज़िंदगी। मुंबई की ज़िंदादिली...

फिर सब कुछ पटरी पर लौट आएगा... अगली वारदात तक.... और कोई चारा भी तो नहीं।

Friday, November 7, 2008

अमेरिका का नेशनल फ्लैग मेड इन चाईना...!


ऐसा शायद हम तिरंगे के साथ नहीं कर सकते। ये तिरंगे का अपमान माना जाएगा। ये अमेरिका में ही संभव है। इन तस्वीरों को ग़ौर से देखिए। ये अमेरिका का राष्ट्रीय ध्वज है। लेकिन बना कहां है? मेड इन चाईना! जी हां। ये तस्वीर 5 नवबंर की हैं। नई दिल्ली स्थित अमेरिकन इंफोर्मेशन सेंटर की जहां ओबामा की जीत का जश्न मनाया जा रहा था। पॉलीथीन के बने सैकड़ों झंडे लगाए गए थे। सब पर मेड इन चाईना का ऐसा ही मार्का लगा था। अपना राष्ट्रीय ध्वज चीन में बनवाने के पीछे की वजह साफ है। मानव श्रम की उपलब्धता से लेकर प्रदूषण निरोधी नीति तक... कई कारणों से अमेरिका जैसे विकसित देश को नहीं लगता कि ऐसे छोटे-छोटे कामों में अपना वक्त और ताक़त ख़र्च करें। सस्ता माल चीन से उठा लेते हैं। चाहे राष्ट्रीय ध्वज ही क्यों न हो!

Wednesday, November 5, 2008

टीवी रिपोर्टरों की खींचतान में गए ओबामा!

ये दो तस्वीरें हैं अमेरिकन इंफॉरमेशन सेंटर नई दिल्ली की जहां आज चुनाव नतीजों के लिए ख़ास इंतज़ाम किए गए थे। ओबामा की जीत के बाद कई चैनलों के रिपोर्टर ओबामा की इस आदमकद कटआउट के साथ पीटीसी करने के चक्कर में आपसी खींचतान में लग गए। नतीजा... अमेरिकी दूतावास की एक महिला अधिकारी ओबामा को उठा ले गई। हां... इसके पहले दिल्ली के एक नामी महिला कॉलेज की लड़कियों ने ओबामा के इस बुत के साथ ख़ूब तस्वीरें खिंचवाईं।