Thursday, April 24, 2008

बहुत ख़ूब अबरार भाई... अच्छा लिखा है

मेरी अधूरी कविता को पूरी करने की गुज़ारिश को अबरार अहमद ने कुछ इस तरह लिया। अबरार की ये कोशिश मेरे लिए काफी मायने रखती है। सोचिए... एक ऐसी कविता जिसकी शुरुआती पंक्ति मैंने लिखी हो... आगे की अबरार ने... और उससे भी आगे की किसी और ने... तो कैसी सामूहिक कविता होगी... हर किसी के जानने समझने की दुनिया के हिसाब से सोच, परिकल्पना, दर्शन, अभिलाषा... आदि सामने आएगी। खैर अबरार की पंक्तियां महसूस करें।

अंतरिक्ष में बारात जाएगी।
मंगल से पानी आएगा।
धरती सूखती जाएगी।
और हम सब भोजन की जगह टैबलेट खा रहे होंगे।
किस किस पर लिखेगा तू किस किस को छोड़ेगा...
तेरी लेखनी से तेज़ सृष्टिचक्र चल रहा होगा।

इंसान की नजरों का पानी सूख चुका होगा।
बाप बेटे से तो बेटा बाप से उब चुका होगा।
रात उजली तो दिन अंधियारे की गर्त में होगा।
आदमी का चेहरा कई पर्त में होगा।
किस किस पर लिखेगा तू किस किस को छोड़ेगा...
तेरी लेखनी से तेज़ सृष्टिचक्र चल रहा...

Wednesday, April 23, 2008

इन पंक्तियों को आप पूरा करें...

ऐ कवि,

जिस क्षण तू ये कविता लिख रहा होगा
उस क्षण भी हर तरफ कलयुग घट रहा होगा
किस किस पर लिखेगा तू किस किस को छोड़ेगा
तेरी लेखनी से तेज़ सृष्टिचक्र चल रहा होगा

घर की ही बात लो तो
कई चित्र उभरते हैं
तुम्हारे धरोहर औऱ संस्कार
ऐसे टूट बिखरते हैं
कि कहीं कोई अपना अपनो से कट रहा होगा
बाप की ज़मीन का टुकड़ा बेटों में बंट रहा होगा
उस क्षण भी हर तरफ कलयुग घट रहा होगा...

ये पंक्तियां मैने अपने कॉलेज के दिनों में लिखी। कम से कम दो पन्नों पर। इनमें ओजोन परत में बड़े हो रहे छेद पर भी लिखा...

पर्यावरण का प्रश्न अधिकार के बाहर है
खुद किया गया विनाश प्रतिकार के बाहर है
तू फ्रिज़ का पानी पी इधर... सो रहा होगा
ओजोन परत का छेद उधर... बड़ा हो रहा होगा

किस किस पर लिखेगा तू किस किस को छोड़ेगा...
तेरी लेखनी से तेज़ सृष्टिचक्र चल रहा होगा...

मेरी डायरी के ये पन्ने गुम गए। कई साल से ढूंढ़ रहा हूं। नहीं मिल रहे। लेकिन अगर आप इन पंक्तियों को आगे बढ़ा पाएं तो शायद तसल्ली मिले।

Friday, April 18, 2008

पिता के छोड़ जाने पर बेटे की कलम से

Dear Friends,

I lost my father, a noted Urdu Journalist Shri Parwana Rudaulvi on 12 th April 2008. He never compromised on journalistic principles through out his life. He was 74. A true soldier of pen he wrote several books, articles and commentaries for AIR.

He had equal command over English and Urdu languages. He was a very good translator, an encyclopedia. I never saw him using dictionary for translations. He was awarded Dalmia award for National integration.Urdu Academy, Delhi also awarded him for his journalistic career. He was also awarded by UP Urdu Academy for his short stories collection JONK.

Urdu press all over India and Hindi Press in and around Lucknow, Faizabad, Barabanki have given wider coverages to untimely death of a such a rare soul. Daily Rashtriya Sahara Urdu brought out special supplement to pay homage to Shri Parwana Rudaulvi on 14th April 2008. We are receiving condolence messages from all over India and from unknown persons telling us how our father touched their heart with his good deed and writings. Urdu Newspapers are reporting about condolence meetings being held almost every day at places like Saharan Pur, Muradabad, Rampur, Deoband, Rudauli etc. Several literary and social organizations have sent their condolence messages to share our pain.

ON THURSDAY 17Th APRIL AT 5 PM , Naidunia National Forum is organizing a condolence meeting at GHALIB ACADEMY, Nizamuddin,New Delhi.

To know more about Shri Parwana Rudaulvi you can click following link on Rudauli on line

and on you tube on the following link.

Thanks for sharing our pain. Thank you Tehseen Munawer

Wednesday, April 16, 2008

20 farm suicides in three days in Vidarbha!

Despite the central government's unprecedented Rs.600 billion ($15 billion) loan waiver, farm suicides continue unabated in Vidarbha with as many as 20 of them reported from different districts of the region in the last 72 hours.

While the latest, of a 65-year-old farmer, was reported from village Kondala in eastern Vidarbha's Chandrapur district Saturday, 18 of the 20 suicides occurred in the region's western part, comprising Yavatmal, Amravati, Buldana, Akola and Washim districts.The Kondala farmer, Rambhau Kale, who jumped in a well Friday midnight, had taken Rs.95,000 in loans from two banks - the district cooperative bank and land development bank, besides some amounts borrowed from relatives, his family sources said.

'Besides being worried about the loan, the old man was also depressed because of his ill health and mounting medical bills,' Vidarbha Jan Andolan Samiti (VJAS) president Kishor Tiwari told IANS, quoting Rambhau's son Vitthal. Returning from a private hospital in the sub-district headquarter of Warora Friday morning, Rambhau reportedly told his son that he would 'die in debt'. Rambhau owned 10 acres of arid land and, therefore, was not eligible for the loan waiver, which is applicable only to farmers owning up to five acres. 'The optimism expressed by political leaders in the state including Chief Minister Vilasrao Deshmukh that the five-acre cap would be raised to 15 acres for the un-irrigated regions to cover farmers like him apparently didn't boost Rambhau's morale', Tiwari said.

Another of Vidarbha's baffling suicides was that of Babanrao Jeughale of village Varvand in Buldana district who Friday jumped onto a burning haystack. Son of a former moneylender, the 48-year-old Jeughale had sold four acres of land two years ago to raise money for his daughter's marriage.'Babanrao's second daughter is now marriageable and the prospect of having to sell off another chunk of land for her wedding had left him dejected,' his younger brother Dattatray told reporters. With a bank loan of over Rs.40,000, the farmer had yet another worry - of raising money to pay donation for his HSC-pass third daughter's admission to a D Ed (Diploma in Education) college or terminating her education, Dattatray said.

The 20 suicides, reported between Friday and Sunday, have taken the toll in Vidarbha since the announcement of the union budget to 116 and since Jan 1 this year to 282, the VJAS leader told IANS. Tiwari said, the loan waiver, even after raising the five-acre land holding cap, would not by itself end the complex agrarian crisis. 'Farmers, particularly the cotton cultivators in Vidarbha, must get remunerative prices for their produce. Also, a regulatory mechanism to reduce their input costs must be devised,' he said. Indo Asian News Service Nagpur, Maharashtra, India, 2008-04-13 20:45:02 (

Friday, April 11, 2008

मज़बूती से टिके मुशर्रफ़

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने नवनिर्वाचित संसद के संयुक्त अधिवेशन की जगह सिर्फ नेशनल एसेंबली का सत्र बुलाया और इस तरह खुद को संसद के सामने अभिभाषण से दूर रखा। कई हलकों में इसका मतलब मुशर्रफ की लगातार कमज़ोर होती स्थिति से लगाया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान में चुनाव के बाद से अब तक के कई तथ्य ऐसे हैं जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि मुशर्रफ अभी भी न सिर्फ मज़बूती के साथ अपने पद पर टिके हैं बल्कि अपनी कई शर्तें भी मनवाने में कामयाब रहे हैं। बीते फरवरी जैसे जैसे पाकिस्तान में चुनाव के ट्रेंड और नतीज़े सामने आ रहे थे तभी से मुशर्रफ़ की स्थिति को लेकर तरह तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। मैं उस समय रावलपिंडी और इस्लामाबाद के अलग अलग इलाक़ों में चुनाव से जुड़ी सूचनाएं जुटा रहा था। जब चुनाव के नतीज़े पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पीएमएल नवाज़ के हक़ में बढ़ रहे थे तभी दिल्ली से एक फोन आया। एक जानकार ने सूचना देने के अंदाज़ में पूछा कि सुना है मुशर्रफ देश छोड़ कर भागने वाले हैं। उसके लिए एक हवाई जहाज़ तैयार खड़ा है जो उन्हें टर्की ले जाएगा। मैंने छूटते ही कहा कि मुशर्रफ कहीं नहीं जा रहे। चुनाव के नतीजे जो भी हों, मुशर्रफ़ की संवैधानिक स्थिति देश के राष्ट्रपति की है। उस राष्ट्रपति की जिनके पास पाकिस्तान के संविधान की धारा 58 2बी के तहत किसी भी चुनी हुई संसद को कभी भी भंग कर देने का अधिकार है। वो राष्ट्रपति जो लंबे समय तक सेना प्रमुख की वर्दी में रहा और फिर देश में इमरजेंसी लगाने के बाद वर्दी उतारी और सिविलियन प्रेसीडेंट के तौर पर अपने को पेश कर दिया। सबसे बड़ी बात की मुशर्रफ अमेरिका के चहेते हैं और कई कारणों से अमेरिका मुशर्रफ के पीछे खड़ा है। ऐसे में मुशर्रफ की पार्टी बेशक बुरी तरह हार रही हो लेकिन इसका मुशर्रफ की व्यक्तिगत सेहत पर कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला। आखिरकार अब तक हो भी वही रहा है।

बेनज़ीर की हत्या के बाद और चुनाव के पहले जब मैंने नवाज़ शरीफ से पूछा था कि क्या वे पीपीपी के साथ मिल कर चुनाव बना सकते हैं तो उनका जवाब था कि मुशर्रफ को शिकस्ते फाश करने के लिए अगर ऐसा ज़रुरी हुआ तो वो ऐसा ज़रुर करेंगे। तमाम रस्सकशी के बाद पीएमएल एन ने पीपीपी के साथ मिल कर सरकार बनायी। अवामी नेशनल पार्टी जैसी कुछ पार्टियां भी साथ आयीं। नवाज़ की पार्टी से मंत्री बने सांसदों को उसी मुशर्रफ ने शपथ दिलायी जिसे नवाज़ शरीफ आज भी गैर संवैधानिक राष्ट्रपति करार देने से नहीं चूकते। ज़ाहिर है नवाज़ शरीफ जैसे मंजे राजनीतिज्ञ के पास भी फिलवक्त मुशर्रफ का कोई काट नहीं है। वे मजबूरी में ही सही उन्हें राष्ट्रपति की भूमिका में स्वीकारना पड़ा है। बयानबाज़ी वो कुछ भी करते रहें। इस मामले में स्व. बेनज़ीर भुट्टो के पति और पीपीपी के सह अध्यक्ष आसिफ अली ज़रदारी नवाज़ शरीफ से बीस साबित हो रहे हैं। मुशर्रफ ने चुनाव के आ रहे नतीजों के दौरान ही कहा कि वो नई सरकार के साथ कामकाज़ी रिश्ते बना कर चलने को तैयार हैं। हालांकि ये मुशर्रफ का भी मजबूरी भरा बयान था क्योंकि उनके पास कोई चारा नहीं बचा। लेकिन अव्वल तो मुशर्रफ की संवैधानिक स्थिति और फिर अमेरिका के दबाव ने ज़रदारी को भी समझौतावादी रुख अपनाने को बाध्य कर दिया। वो टकराव का रास्ता अपना बेनज़ीर के अमेरिकी दोस्तों का कोपभाजन नहीं बनना चाहते थे और ना ही मुशर्रफ के हाथों पीपीपी की अगुवाई वाली सरकार को गिराना। लिहाज़ा उन्होने उल्टा नवाज़ शरीफ को ही मना लिया कि वो मुशर्रफ के 'शिकस्ते फाश' यानि जड़ से ख़त्म करने की ज़िद फिलहाल छोड़ दें। वही हुआ। नवनिर्वाचित सरकार के मुखिया यूसुफ रज़ा गिलानी ने भी मुशर्रफ के साथ चलने की बात दोहराई। बेशक स्पीकर फहमीदा मिर्ज़ा महाभियोग लाने जैसे बात करती नज़र आती हों, लेकिन सरकार चलती रहे इसके लिए ज़रूरी है कि मुशर्रफ के साथ 'वर्किंग रिलेशनशिप' बनाए रखा जाए।

फिलहाल पाकिस्तान में कई चीज़ें एक साथ चल रही हैं। मुशर्रफ विरोधी जजों की रिहाई तो कर दी गई लेकिन उन्हें बहाल नहीं किया गया। एक ख़बर आयी कि पीपीपी चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी को छोड़ कर बाक़ी सभी जजों की बहाली को तैयार है। इफ्तिखार को दरकिनार करने की ज़रदारी की कोशिश के पीछे एक वजह और है। मुशर्रफ ने 1973 के संविधान को ताक पर रख कर जिस प्रोविजिनल कांस्टीच्यूशनल आर्डर यानि पीसीओ के तहत जजों की बहाली की उन्ही के सौजन्य से ज़रदारी और बेनज़ीर को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्ति मिली। तो अगर इफ्तिखार चौधरी ने दुबारा चीफ जस्टिस की कुर्सी संभाला तो पीसीओ के तहत लिए गए तमाम फैसलों के साथ साथ ये फैसला भी सवालों के घेरे में आ सकता है। इसलिए 3 नवबंर की इमरजेंसी के पहले के चीफ जस्टिस न सिर्फ मुशर्रफ बल्कि ज़रदारी के लिए भी ख़तरे की घंटी साबित हो सकते हैं। लेकिन चौधरी इफ्तिखार को बहाल नहीं करने का मतलब होगा नवाज़ शरीफ ने ज़रदारी के साथ जो चार्टर ऑफ डेमोक्रेसी साइन किया है उसका सीधा सीधा उल्लंघन। ऐसे में नवाज़ की पार्टी को अपना चेहरा बचाने के लिए सरकार से निकलना पड़ सकता है। ऐसे में पीपीपी एमक्यूएम के साथ रिश्ते मज़बूत कर और मुशर्रफ की काफ़ लीग के क़रीब चार दर्जन सांसदों को साथ लेकर वैकल्पिक रणनीति बनाने की तरफ जा सकती है। बेशक सिंध सूबे में एमक्यूएम के साथ पीपीपी को मिलकर सरकार बनानी पड़ी हो। लेकिन पीपीपी का एक खेमा एमक्यूएम को कराची में अपने कार्यकर्ताओं की हत्या का दोषी मानती है और वे एमक्यूएम को राष्ट्रीय सरकार में शामिल करने के बिल्कुल खिलाफ है। ऐसे में पार्टी की टूट की बात भी कही जा रही है। हालांकि ऐसा होने की संभावना काफी कम है। इसके पीछे वजह ये है कि प्रधानमंत्री पद के लिए मखदूम अमीन फहीम, शाह महमूद कुरैशी और चौधरी अहमद मुख्तार जैसे नामों को उछाल इनके आपस में खींचतान पैदा करने के बाद ज़रदारी ने बड़ी होशियारी से यूसुफ रज़ा गिलानी को प्रधानमंत्री बनवा दिया। इससे असंतुष्ट का कोई बड़ा गुट नहीं बचा बल्कि वो छोटे छोटे गुट में बंट गए। इस बीच ज़रदारी के हैदराबाद के भरोसेमंद सांसद ने ज़रदारी की प्रधानमंत्री बनने की इच्छा की बात फैला कर एक तरह पार्टी के भीतर और बाहर की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की। ज़रदारी के नेशनल एसेंबली में चुन कर आ जाने के बाद प्रधानमंत्री पद को लेकर एक बार फिर खींचतान की आशंका अभी ख़त्म नहीं हुई है।

इन सब बातों के बीच एक बात जो नहीं बदली प्रतीत होती है वो है पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की स्थिति। मुशर्रफ़ ने हाल के अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर वे अपने पद से हटे तो अमेरिका पाकिस्तान के कबाईली इलाक़े पर हमला कर देगा। उनका कहना है कि अमेरिका उन्हीं की वजह से पाकिस्तान में सीधे उतरने से रुका हुआ है। नहीं तो तालिबान और अलक़ायदा जैसी ताक़तों से निपटने के लिए वो अपनी फौज़ पाकिस्तान में उतारने तनिक भी देर नहीं लगाएगा। मुशर्रफ का ये बयान अमेरिका के खिलाफ नहीं है। बल्कि नई नई आयी जम्हूरियत के उन नुमाइंदों के खिलाफ है जो मुशर्रफ का ताज़ छीनने की मंशा पाले हुए हैं। हो सकता है कि ये बयान अमेरिकी शह पर ही दिया गया हो ताकि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे।

Tuesday, April 8, 2008

'ज़मीन-ए-हिंद में क़ाबिल बिहार वाले हैं...'

'ज़मीन-ए-हिंद में क़ाबिल बिहार वाले हैं...' ये मेरा कहना नहीं है... ब्लू लाइन बस से लेकर होली के त्योहार तक पर... मुशर्रफ की हार से लेकर ऑस्ट्रेलिया की हेकड़ी तक पर... ऐसी ही कई और पंक्तियां हैं जो आप देख सकते हैं नीचे की लिंक पर क्लिक करके... तहसीन मुनव्वर की कलम से...


Tuesday, April 1, 2008

It's a mail from Pakistan...Must read it & be mindful!

Dear All,


Military intelligence has information that terrorists have devised a new method of targeting and exploding bombs.

Example - You park your vehicle in a public area and go away to attend to your job. Some one can plant a bomb in your vehicle connected with GPS system and track your movements/whereabouts and activate the bomb when you are passing or close to the desired target area.

Hence it is best for us to be vigilant at all times as this could be a possibility which the terrorists will look at.

This works same as a Tracking Device works, that we normally use to secure our vehicles. A Sms is sent on the SIM installed on that device, and upon receiving the sms, the device sends back the Latitude and Longitude of its current location. The terrorist can easily use google earth or his own built-in maps to figure out the location of the vehicle.

The difference here is, that another sms can be send to the device, instructing it to activate the bomb. and it works. The bad side of this is unknowingly you can be carrying a bomb with you and if you are stopped at a check point you will become an innocent victim and it goes without saying what trouble you will have to go through thereafter.

Please be mindful of such possibilities.

Forward this to your loved ones please, so that we all can stop the acts of these evil minds who are busy in bringing a bad name to our nation. It’s a very high-tech kind of thing but its better to have our eyes n ears open as its believed that recent bomb blast at Islamabad was conducted by using the same method. During the period of 15th March till 31st March, Liberty Market Lahore, Fortress Stadium and DHA…