Wednesday, October 3, 2007

"आम आदमी का हाथ, अपराधियों के साथ"

लोकसभा चुनाव के पुन: मंडराते सत्य को देखते हुए भारत की जनता ने एक मीटिंग का आयोजन किया। मक़सद ये रहा कि इस बार सरकार बनाने के लिए कैसे लोगों को सांसद चुना जाए। इस मीटिंग में देश के कोने कोने से और हर तबके के लोग शामिल हुए। तमाम प्रकार की मीटिंग्स की 'आम प्रकृति' के विपरीत यह एक अद्वितीय मीटिंग थी जिसमें लिए गए फ़ैसले बिल्कुल समयानुकूल रहे।

दिल्ली चलो के बैनर तले लोग ट्रेन भर भर के दिल्ली आए। फिर भी सबों ने रेल का पूरा-पूरा किराया दिया। ताकि लालू जी के मुनाफ़े में कोई कमी ना आए। वे आरक्षित डिब्बे में भी नहीं घुसे। अनुशासित व्यवहार किया। सभी शांतिपूर्वक सभा-स्थल तक पहुंचे। मीटिंग के दौरान और पश्चात भी जूतमपैज़ार की कोई नौबत नहीं आयी। बिना किसी विशेष बहस या गहन विचार-विमर्श के मीटिंगकर्ता एक नतीज़े पर पहुंच गए। किसी ने भी अलग राग नहीं अलापा। मतभिन्नता प्रकट नहीं की। इस प्रकार ये प्रयास सफल होता प्रतीत हुआ।

पहली बार देश की सम्पूर्ण जनता किसी मुद्दे पर एकमत हुई है। शायद इसलिए भी कि अब कोई दूसरा चारा नहीं बचा है। देश की व्यवस्था के मूल को तो वो पहले से ही समझ रही थी। इस मीटिंग की उपलब्धि ये रही कि उसे स्वीकार भी लिया गया। तय हुआ कि अब औऱ मुग़ालते में नहीं रहना चाहिए। समय आ गया है जब 'समय की मांग' को ध्यान में रख कर ही कदम उठाएं जाएं। अभी तक सांसद बनने वाले अधिकतर नेता नक़ाब ओढ़ते रहे हैं। इससे उन्हें समझने में भोली जनता को कठिनाई होती है। जनता को समझाने के लिए नेताओं को भी प्रपंचों का सहारा लेना पड़ता है। अत क्यों ना इस मजबूरी को मिटा दिया जाए। नेताओं को अपने असली रुप में सामने आने का मौक़ा दिया जाए।

तो सर्वसम्मति से यही फ़ैसला लिया गया कि उम्मीदवार चाहे जिस भी किसी पार्टी का हो, या उसे अघोषित अंतरंग संबंध रखता हो, सांसद चुने जाने के योग्य समझे जाएंगे बशर्ते आगे लिखे मापदंडों पर खरे उतरते हों।

इस बार आदर्श-मूल्यों आदि की बात करना ग़लत तरीक़े से सांसद चुने जाने का प्रयास माना जाएगा। इसलिए इस बार वही उम्मीदवार सफल होगें जो आपराधिक कार्यवृति या मनोवृति के हों। हर तरह के अपराध करने में सक्षम हों। उनका पढ़ा-लिखा होना तो अब तक ज़रुरी नहीं ही था... इस बार पुलिस रिकार्ड में फिंगर प्रिंट वाले को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, झूठे गवाह तैयार करने, प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने, पुलिस से मिलीभगत रखने जैसे कामों में दक्ष उम्मीदवार प्रिय पात्र होंगे।

इस विकासशील देश के भावी सांसदों को हर प्रकार के अपराध करने का अनुभव होना अनिवार्य है। इस क्षेत्र में नई तकनीकी का इस्तेमाल करने, जैसे तंदूरी हत्या, करने वाले केन्द्र बिंदु में रहेंगे। सज़ायाफ्ता या हिस्ट्रीशीटर निर्विरोध चुन लिए जाएंगे। प्रेरणा के लिए अतीक अहमद, मोहम्मद शहाबुद्दीन, पप्पू यादव जैसे नेताओं की मोम की प्रतिमा संसद के गलियारे में लगायी जाएंगी। अमिताभ और शाहरुख़ से भी कोमल प्रतिमाएं... ताकि इनके सामने ग़लती से भी कोई आदर्श और मूल्यों की बात करे तो प्रतिमाएं शर्म से गल जाएं। और सच्चे आदर्शवादी नेता मौक़े पर ही पकड़े जाएं।

देश की जनता ने महसूस किया है कि मतदान के दौरान बूथ कैप्चरिंग आदि में सौ झमेले हैं। नाहक निर्दोषों की जान चली जाती है। उम्मीदवारों पर आरोप प्रत्यारोप लगते हैं और चुनाव आयोग का समय ख़राब होता है। इसलिए इस बार प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार की जगह लाउडिस्पीकर से ये बताना होगा कि मतदाताओं को वोट डालने बूथ तक जाना है या नहीं। अगर नहीं जाना तो और अच्छी बात है। वे आराम से घर पर बैठ एमटीवी देखें और लहर नमक़ीन खाकर मतदान तिथि को सेलिब्रेट करें। उधर प्रत्याशीगण यथाशक्ति वोटों का बंटवारा कर लें। इससे गोली बारूद के पैसे बचेंगे। इन पैसों से नेता और उनके प्यादों को दारू की और बोतलें मिल सकेंगी।

इन बातों के अलावा, जिन नेताओं की आपराधिक पृष्ठभूमि संतोषप्रद नहीं रही है, लेकिन इस विषय में कुछ कर गुज़रने की जिनकी गहरी महत्वाकांक्षा है, उनके लिए भी जनता ने संसद के दरवाज़े खुले रखने का फ़ैसला किया है। शर्त सिर्फ यही कि चुनाव होने के ऐन पहले तक वे अपनी योग्यता साबित कर दें।

अंत में, भारतीय जनता की सिर्फ एक विनती है। संसद में पहुंचने के बाद एकाध करोड़ जैसी छोटी मोटी रकम के लिए भ्रष्टाचार की गरिमा को क्षति ना पहुंचाएं। सेज़, रिटेल सेक्टर में विदेशी कंपनियां, हवाई अड्डों के निजीकरण जैसे बड़े मौक़े हैं। हमेशा अरबों में खेलने की कोशिश करें। जनता का नारा है, "आम आदमी का हाथ, अपराधियों के साथ"।

आप भी लगाइए।

3 comments:

अनिल रघुराज said...

अच्छी पेशकश है। जनता का आदेश है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। आनंद मोहन की फांसी सजा रद्द करवाकर उन्हें अभी से अगले युवा प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया जाए। शिबू सोरेन उनके गृह मंत्री होंगे। यह मुनादी भी करवा दी जाए कि जिसने कम से कम 100 अरब रुपए का घोटाला किया हो, वित्त मंत्री का पद उसके लिए आरक्षित किया जाएगा।

संजय तिवारी said...

पढ़ लिया जी.

manoj said...

Bhai Umashankar singh ji.u r really a good thinkar but why u hv mentioned ur astrilogical nonsenses in ur profile? manoj