Friday, November 9, 2007

इमरजेंसी में ब्लोगिंग : मेरी सौवीं पोस्ट

बेनज़ीर को हॉउस अरेस्ट करने की ख़बर है. रावलपिंडी जाने के सारे रास्ते ब्लाक किए जाने की भी ख़बर है जहाँ बेनज़ीर की सभा होने वाली थी. पीपीपी वर्करों को बड़े पैमाने पर पकड़े जाने की सूचना है. अखबारों में जेन मुशर्रफ का बयान प्रमुखता से छपा है कि १५ फरवरी के पहले चुनाव हो जायेंगे. अमेरिकी प्रेसिडेंट बुश का बयान भी है कि उन्होंने पाकिस्तान में चुनाव और वर्दी छोड़ने के मुत्तालिक मुशर्रफ से दो टूक बात की है. ये यहाँ के लिए उम्मीद जगाने वाला बयान है... अगर कुछ और बात सामने नही आई तो...!

यहाँ के पत्रकारों ने बाजू पर काली पट्टी बांधनी शुरू कर दी है. तब तक बंधते रहेंगे जब तक इमरजेंसी नही हटा ली जाती. नामी पेंटर और जर्नलिस्ट सलीमा हाश्मी बाजू पर भी ये नज़र आ रही है. अपने अपने हिसाब से लोग खड़े हो रहे है.

पाकिस्तान में ब्लोग्स अभी उतना लोकप्रिय नही हुआ है. लेकिन मेरे लिए ये यहाँ किसी वरदान से कम नही. जो कुछ भी यहाँ देखता हूँ, वक्त पर पोस्ट कर देता हूँ. और कोई जरिया अभी नही है. यहाँ हिन्दी सॉफ्ट-वेअर नही है. लेकिन उसका रास्ता मैंने कुछ इस तरह निकला. गूगल के ट्रांसलिट्रेशन पर जा कर रोमन में टाइप करता हूँ. वो उसे देवनागरी में बदल देता है. आप में से कई इससे परिचित होंगे. नेपाली, अफगानी, बंगलादेशी, श्रीलंकन... सारे दोस्त समझते हैं कि मैं बहुत टेक्नो-सेवी हूँ. जब बताता हूँ कि मैं कम्प्यूटर अज्ञानी हूँ टू इन्हे भरोसा नही होता.

आज दीवाली है. पाकिस्तान समेत यहाँ जितने भी मुल्क के लोग हैं सबों ने दिवाली विश. इतना सारे विश जितने दिल्ली में रहते हुए कभी नही मिले. दिल्ली में तो ज्यादातर एसऍमएस से ही लोग काम चलाते हैं.

दीवाली पर यहाँ हमें मन्दिर ले जाने का बंदोबस्त किया गया है. हालांकि मैं बहुत ज़्यादा धार्मिक प्रवृति का नही हूँ. लेकिन यहाँ मन्दिर जा रहा हूँ तो यहाँ के अल्पसंख्यकों से शायद मुलाक़ात हो जाए. देखू तो वो किस हाल में है. जैसा प्रपोगेट किया जाता रहा है वैसा या फिर बेहतर. दरअसल पाकिस्तान का ये दौरा कई मायनो में आँखें खोलने वाला साबित हो रहा है. कई सुनी-सुनायी बातें यहाँ बेतुकी साबित हो रहीं है. कई अनजान पहलू सामने आ रहें है. इनमें से ज्यादातर सुखद अनुभूति देने वाले है.

जिस गेस्ट हॉउस में ठहरें है... वहाँ शाम को दीवाली मनायी जायेगी. बंगलादेशी दोस्त फ़रहाना सुबह बहुत खुश थी कि आज दीवाली की छुट्टी होगी. लेकिन नही मिली तो दुखी है. उसे मन्दिर जाने को भी नही मिल रहा है. लिहाज़ा नेपाल के दो और इंडिया के दो, कुल चार जो हिंदू हैं लोग ही मन्दिर जा सकते हैं. खैर... सुरक्षा वजहों से ये यहाँ की स्थानीय व्यवस्था है. हम कुछ नही कह सकते.

5 comments:

उन्मुक्त said...

आंखों देखा हाल अच्छा है। सौंवे पोस्ट की बधाई।

Sanjeet Tripathi said...

विरोध तो ज़रुरी ही है भाई चाहे प्रतीकात्मक रूप मे ही सही!!
ब्लॉग्स पर पाबंदी नही लगी है यह एक सुखद आश्चर्य की बात है।

दीपावली की बधाई व शुभकामनाएं।
सौवीं पोस्ट की भी बधाई व हजारवीं के लिए शुभकामनाएं

राजीव said...

उमाशंकर जी, यह पोस्ट तो आपके लिये मील का पत्थर है। असामान्य परिस्थितियाँ, दीपावली का त्यौहार, पड़ोसी मुल्क और यह पोस्टों का शतक!
आपको बहुत बहुत बधाई। पोस्ट के शतक की और दीपावली की भी!

masijeevi said...

हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के लिहाज से आपकी ये पोस्टें बहुत ही अहम हैं। जारी रहें, अपनी सुरक्षा का ध्‍यान रखें

उमाशंकर सिंह said...

aap sabon ka shukria. santushti iss baat kee hai ki gambheer bloggers tak baat pahunch rahee hai. aik patrkaar ke taur par wakai ye mushkil din hain.