Wednesday, June 11, 2008

सॉरी, साईं बाबा की बाइट मिस हो गई!

साईं बाबा बोल रहे थे। साक्षात। भक्त जनों को संबोधित कर रहे थे। वो दीवार से टिक कर खड़े थे। उनके दो सहयोगी उनके साथ थे। इस फ्रेम में थ्री-शॉट था। सिर्फ बाबा बोल रहे थे। बाक़ी दोनों खामोश थे। शरीर में कोई हरकत भी नहीं हो रही थी। साईं बाबा के भी सिर्फ होठ हिल रहे थे। बाक़ी पूरा फ्रेम फिक्स था। किसी चैनल का गन-माइक भी नज़र नहीं आ रहा था। ना ही बाबा के कुरते से झांकता लेपल माइक ही। पर बाबा बोल रहे थे। शायद कैमरा माइक पर। एक बाइट टाइट-फ्रेम में भी थी। अस्सी साल पहले तब टेक्नोलॉजी इतनी विकसित नहीं हुई थी। ना ही टीवी पत्रकारिता इस मुकाम पर पहुंची थी। तब बाइट लेने वाले को शायद साई बाबा की बाइट की अहमियत भी नहीं पता होगी। कोई स्ट्रिंगर टाईप रहा होगा। बाबा मिल गए तो ले लिया होगा। बिना किसी चैनल आइडी के। किस मीडिया हाउस के के काम आ जाए पता नहीं। सो आरकाइब कर लिया होगा।


अस्सी साल बाद ये टेप बाहर आया। इन अस्सी सालों में दुनिया ने बहुत तरक्की की। ख़ास तौर पर पिछले कुछ सालों में इंडिया में टीवी ने पत्रकारिता में कई झंडे गाड़े हैं। ख़बर को नीरस और उबाऊ होने से बचाया है। जितनी तरक्की प्रसारण तकनीकी में हुई है उससे कहीं ज़्यादा इन तकनीकी वरदानों को निर्देशित करने वालों का मानसिक परिष्करण हुआ है। यही वजह है कि अस्सी साल से धूल खा रहा साईं बाबा की बाइट वाला टेप बाहर निकल पाया। इंवेस्टिगेटिव कैटेगरी की पत्रकारिता भी इसे कह सकते हैं। इसी खोजबीन के बूते भक्त बाबा को बोलते हुए देख-सुन पाए। ये अलग बात है कि पहले इसे दिखा कर श्रद्धा और सबुरी से भरे दर्शकों का ध्यान खींचा। फिर थोड़ी देर बाद में इस टेप को ग़लत बताने लगे। अच्छा हुआ जल्द पता चल गया। नहीं तो कई दूसरे चैनलों के रिपोर्टरों की तो बस वाट लगने वाली थी। उनसे पूछा जाता कि तुम्हारे पुरखे क्या कर रहे थे जब बाबा बाईट दे रहे थे। वो वहां क्यों नहीं थे। क्या उनका पुश्तैनी पेशा कुछ और था... तो तुम इस पेशे में क्या कर रहे हो। जाओ। जहां से भी बाबा की बाईट लेकर आओ। नहीं तो दफा हो जाओ।



हालांकि ट्रांसफर टेक्नीलॉजी ने तेज़ी से अपनी जगह बना ली है। मेरे जैसे कई रिपोर्टर अब कई बार एक टेप लेकर शूट पर निकल पड़ते हैं। कैमरे की चिंता नहीं होती। अपने श्रमजीवी पत्रकार मित्र मंडली में कम से कम दो तो ऐसे मिल ही जाते हैं कि एक के कैमरे में टेप डाल दूसरे से ट्रांसफर ले लें। झंझट तब होता है जब किसी के सिंगल माइक पर बाइट हो। लेकिन बाबा की बाइट में ये समस्या भी नहीं थी। कोई आईडी थी ही नहीं। सो किसी को भी आराम से ट्रांसफर मिल जाता। वैसे भी ये आस्था को बेचने का मामला था। सो कोई एक्सक्लुसिव होने का भ्रम नहीं दे सकता था। जो जिस हिसाब से चलाना चाहते... चला सकते थे। चलाया भी। इस ख़बर से जैसे खेल सकते थे... खेला भी। ये तो अच्छा हुआ कि जिस मार्फिंग को उच्च पदस्थ पत्रकारों की पारखी नज़र नहीं पकड़ पायी उसे कंम्प्यूटर तकनीकी के कुछ जानकारों ने पकड़ा। फिर संपादकीय फैसले और एंकरों के प्रभावशाली हावभावों के ज़रिए आस्थावान दर्शको को बताया कि वो इस चक्कर में ना पड़ें। ना ही अपनी आस्था पर कोई चोट लगा महसूस करें। ये कोई अस्सी साल पहले रिकार्ड की गई साई बाबा की बाइट नहीं। कम्प्यूटर की कलाकारी का कमाल है। मिल गया तो दिखा दिया। जब रामायण काल में पुष्पक विमान सर्विस में था... तो 1920 के दशक में कैमरा-बाइट का होना इतनी अजीब बात भी तो नहीं!

4 comments:

Udan Tashtari said...

क्या क्या खेल होते हैं? हमने तो साईं बाबा का यह एक्स्कलूजिव आज तक पर देखा/ :)

भुवनेश शर्मा said...

कुछ भी हो सकता है जी आजकल तो....कल को टीवी चैनल कृष्‍ण को क्‍लब में गोपियों के साथ डांस करते हुए दिखाने लगें और कहें कि तब कृष्‍ण कुछ ऐसा ही करते थे...

सुशील राघव said...

उमा जी नमस्कार

आपने सही लिखा है..... और सबसे बड़ी बात तो यह है कि आप और ना जाने कितने टीवी पत्रकारों की नौकरी बच गई।

anant paliwal said...

uma sir namaskar.......vaise tau bhi aap hi ki tarah ek patrkar huin frak sirf itna hain ki aap ndtv jaise channel mein kam karten hain jiska tv channel ki duniya mein koi bhi sani nahi hai aur mein ek chota sa patrkar huin jo apni pehchan bana ne ki koshishion mein laga huya hain par usian abhi tak sahi rah nahi mil payi hai........mein aapse aaj se ek saal pehle etawah mein mila tah rahul ghandhi ki sabha mein..tab mein times now mein stringer tha aur ek saal mein doordarshan delhi mein production assistant ban gaya......lekin abhi bhi apne vajood ko talash raha huin.... aapne jo bat kahi transfer technology ki aur stringer ki tau mughe ek baat yaad aayi ki aaj bhi jitne channel chal rahe hain unme stringer ki samachar lane mein badi bhumika hoti ahin.....transfer technic inhi ki dain hain varna aak kal ke channel kahan par tik patein