विज्ञापन की दुनिया काफी दिलचस्प है। कम शब्दों में बहुत कुछ कहना होता या फिर सिर्फ एक तस्वीर के ज़रिए। पेश है विज्ञापन की दुनिया के कुछ ऐसे नमूने जो मेल के ज़रिए एक-दूसरे तक पहुंच रहे हैं।

सीधी चढ़ाई, सरपट ढलान
हाथ कई काम आते हैं। अच्छे काम में... कम अच्छे काम में और बुरे काम में भी। किसी को कुछ देने या किसी से कुछ छीनने के काम... हाथ जोड़ने या फिर तोड़ने के काम। हाथ लगाने या खींचने में। सहारा देने या छुड़ाने में। कई बार हमें किसी काम में दूसरों का हाथ नज़र आता है। जैसे भारत में होने वाली हर आतंकी घटना में आईएसआई का हाथ। कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं फिर दाऊद है जो हमारे हाथ ही नहीं आता। कांग्रेस कहती है कि उसका हाथ ग़रीबों के साथ। परमाणु डील पर अमेरिका से हाथ मिलाने पर लेफ्ट सरकार से हाथ खींचने की बात कर रही है। कोई किसी के हाथ में आकर खिलौना हो जाता है। कहते हैं कि हर सफल मर्द के पीछे एक औरत का हाथ होता है। हाथ हिला पास बुलाया जाता है और दूर रहने का इशारा भी। सहलाया भी जाता है और पीटा भी। सिर पर हाथ रख आगे बढाया जाता है और हटा कर गिराया भी। हाथों के इन परंपरागत इस्तेमाल से अलग कुछ अलग हाथ देखिए।
को आप में से कई जानते होगें। अरे वही 'वारदात' आजतक वाले... जो बाद में आईबीएन सेवेन में 'क्राईम द किलर' करने लगे। वे जब कैमरे के सामने होते हैं तो सुंदर दिखते हैं। पर जब कैमरे के पीछे होते हैं तो ज़्यादा सुंदर दिखाते हैं। अगर हम और आप दुनिया की कई चीज़ों को उतनी खूबसूरती के साथ नहीं देख पा रहे जितनी कि देखनी चाहिए... तो इसके पीछे एक बड़ी वजह ये है कि नीरज रिपोर्टर बन गए। अगर वे पेशे के तौर फोटोग्राफी कर रहे होते तो शायद बात कुछ और होती। लेकिन अपने व्यस्त क्षणों में भी लंबी छुट्टी लेकर वे कभी एशिया तो कभी मलेशिया घूम आते हैं। यादों के लम्हों की कुछ तस्वीरें ले आते हैं। कभी मोबाईल कैमरे से खींची तो कभी दूसरे कैमरे से। उनकी खींची कुछेक तस्वीर हाथ लगी है। आपकी नज़र कर रहा हूं। दिलचस्प बात ये है कि ये तस्वीरें किराए के कैमरे से खींची गईं हैं।
लद्दाख में इसी तरह की खूबसूरती है। एकबार जाने पर लौट कर आने की इच्छा नहीं होती। 
लेह से क़रीब डेढ़ सौ किमी दूर पैगॅाग त्सो। 14,500 फीट की उंचाई पर खारे पानी का झील


फूलपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अतीक अहमद अब ईनामी बदमाशों की श्रेणी में आ गए हैं। उत्तर प्रदेस शासन ने उन पर पच्चीस सौ रुपये का ईनाम रखा है। सांसद महोदय पर अपने भाई के साथ मिल कर बीएसपी विधायक राजूपाल की हत्या का आरोप है। फिलहाल फरार चल रहे हैं इसलिए ईनाम रखा गया है। इन पर कई दूसरे आपराधिक मामले भी हैं। राज्य में अब बीएसपी की सरकार है। ऐसे में सिर पर ढाई हज़ार का ईनाम उनके लिए तौहीनी की बात हो सकती है। इनका डीलडौल देखें तो ये वाकई में ज़्यादती लगती है। फिर भी आपको कहीं दिखें तो उत्तर प्रदेश पुलिस को बताने का कष्ट करें। अगर ये छोटे मोटे चोर होते तो शायद ढूंढने में ज़्यादा मेहनत लगता और तब शायद ईनाम की रकम भी बड़ी होती। फिर भी ढाई हज़ार भी कोई छोटी रकम नहीं होती। आप भी ढूंढें मैं भी ढूंढता हूं। देखें किस्मत किसका साथ देती है।


जब बिहार में बाढ़ का पानी तबाही मचा था, मुख्यमंत्री नीतिश कुमार डाक्टरेट की उपाधि लेने मॅारीशस की यात्रा पर निकल पड़े। 30 अधिकारियों की फौज भी उनके साथ गई। मॅारीशस में उन्होने 'बिहार वीक' का उद्घाटन किया। लेकिन क्या वे अपने साथ बिहार की इन तस्वीरों को ले गए...?... उनको इन तस्वीरों को दुनिया भर में दिखाना चाहिए कि ये बिहार की असली तस्वीर है। लेकिन शायद वो अपने मुख्यमंत्री निवास के आसपास की कुछ चमचमाती तस्वीर दिखा कर दुनिया भर के निवेशकों को लुभाने की कोशिश करते हों।
जागिए नीतिश जी, इन तस्वीरों को देखिए... एक बार ठीक से देख लेंगे तो शायद नींद नहीं आएगी...आंखे खुल जाएंगी!
कैमरे के सामने रहने वाली तरु ने कैमरे के पीछे अपनी क़ाबिलियत दिखाने की कोशिश की है। उन्होने अपनी पहली बिहार यात्रा को अपने मोबाईल कैमरे में कुछ इस तरह उतारा है। पटना से मधुबनी तक के इस सफ़र में मैं गाड़ी चलाता रहा और मेरी पत्नी अपना मोबाईल कैमरा।
भरोसा नहीं किया जा सकता। आप तो जानते हैं। वो किस काम से कब कहां होते हैं। किनसे संबंध बनाते है। बीमारी लगाते हैं। फिर आप में फैलाते हैं। ख़ास तौर पर जब दारू पीकर आते हैं तो कंडोम लगाने का ख़्याल नहीं रहता है। आप कंडोम लगाने के लिए कहने से झिझकें नहीं। वो ना लाए तो आप ख़ुद कंडोम ख़रीदें।' - ये रेणुका चौधरी के बयान हैं। वो केन्द्र सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं। उन्होने ये बातें बीते सोमवार को एड्स जागरुकता से जुड़े एक कार्यक्रम में कहीं।
ही नीला पड़ा है। बल्कि ये नीलापन तो मेरे अंदर के ज़हर को ही दर्शाता है। और मेरे ड्राईवर की धमनियों में बहने वाला रक्त तो अभी भी रेड ही है। उसकी तो त्वचा का रंग भी नहीं बदला। मानसिकता बदलने की बात तो दूर। वह तो अभी भी मेरी स्टीयरिंग और एक्सिलेटर के साथ वैसी ही अठखेलियां करता है, जैसी पहले किया करता था। ब्रेक लगाने के मामले में वो अब भी वैसा ही बेपरवाह है। कभी तो झटके से लगा देता है...कभी लगाता ही नहीं। सचमुच बड़ा झेड़ता है मुझे। कंडक्टर सवारियों को पूर्व की भांति ही मुझमें ठूंसता रहता है। हैल्पर मुझ पर थाप देकर और सीटी बजा कर मेरी गति को और रोमांचकारी बना देता है। वो तो शुक्र है कि हम टाटा और लीलैंड जैसे घरानों में पैदा हुए हैं वर्ना.....।' 



स्पेस शटल कोलंबिया के आसमान में इस तरह आग के गोले में तब्दील हो जाने से मिशन स्पेशलिस्ट कल्पना चावला के अलावा जिन 6 अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की जानें गईं वे हैं... उनमें एक और महिला थीं। मिशन स्पेशलिस्ट लाउरेल क्लार्क। बाक़ी पांच अंतरिक्ष यात्री थे 1. विलयम सी मैककूल (पायलट) 2. रिक डी हसबैंड (कमांडर) 3. इयान रमोन (पेलोड स्पेशलिस्ट) 4. माइकल पी एंडरसन, (पेलोड स्पेशलिस्ट) 5. डेविड एम ब्राउन (मिशन स्पेशलिस्ट) इन सबों को हमारी श्रद्धांजलि !
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